गुरुवार, 14 मई 2015

तिश्‍नगी


आके तेरे दर पे अपनी बेबसी अच्छी लगी,
दिल ये गम का घर बना तो बंदगी अच्छी लगी।
मुझसे ना पूछो के मेरे हमसफर कैसे मिले,
बस समझ लो दोस्ती से दुश्मनी अच्छी लगी।
आशिकी के रास्ते में दिल चिरागों सा जला,
मिट गए हम प्यार में पर आशिकी अच्छी लगी।
हर सितम बस इसलिए उस संगदिल का सह गए,
उसके चेहरे पर नुमाया सी हंसी अच्छी लगी।
जल रहा है आशियां मेरा तो कोई गम नहीं,
रोशन है हमसाया का घर तो रोशनी अच्छी लगी।
जाम उसके हाथ में और प्यास मेरे होठों पर,
आज मुद्दत की ये अपनी तिश्‍नगी अच्छी लगी।
दिल नहीं बहला कभी रंगीन महफिल में भी 'राज',
वो मिला तब जाके मुझको जिंदगी अच्छी लगी।

रविवार, 12 अप्रैल 2015

जिंदगी की बात.

कोई बताये कैसे करें हम  ख़ुशी की बात,
रूठी है जब ख़ुशी तो करें क्या ख़ुशी की बात. 
घर के चिराग से है जला मेरा आशियाँ ,
अल्लाह वास्ते न करो रौशनी की बात. 
वो बन के दोस्त मेरा सकूँ-चैन ले गया,
 डरता हूँ अब तो  करते हुए  दोस्ती  की बात. 
तुमसे बिछड़ के जी नहीं पाएं हैं एक पल,
मु‍द्दत हुई है हमको किए जिंदगी की बात.
मरते हैं रोज हम तो कई बार दोस्‍तों,
फिर करके क्‍या करेंगे भला खुदकुशी की बात.
उल्‍फत में हमने खाए हैं इतने फरेब 'राज',
बेमानी हो गई है वफा, आशिकी की बात.

मंगलवार, 31 मार्च 2015

यादों को तेरी


हर सिम्‍त यारा हमने तुमको ही पाया है,
यादों को तेरी हमने दिल में बसाया है।
बस तुम ही रहते हो हर पल हमारे साथ,
दिल पर हमारे यारा तेरा ही साया है।
अक्‍सर ही खुद को भी मैं भूल बैठा हूं ,
जब भी सनम मैंने तुमको भुलाया है।
चेहरे हजारों गुजरे हैं मेरी नजरों से,
नगमा तुम्‍हारा ही हमने तो गाया है।
यादों से तेरी हम करते हैं दिल की बात,
यादों को हाल अपना हमने सुनाया है।

रविवार, 1 मार्च 2015

तुम्हारी याद सताती है


 दिल को हर पल यार तुम्‍हारी याद सताती है,
 लाख भुलाऊं , याद तुम्‍हारी हर पल आती है।
माना मेरे हाथों में , नहीं तुम्‍हारा हाथ,
तन्‍हाई में भी रहती है पर याद तुम्‍हारी साथ,
याद तुम्‍हारी बीते पल के नगमे गाती है,
लाख भुलाऊं , याद तुम्‍हारी हर पल आती है।
लब तो रहते हैं खामोश , दिल बेचारा रोता है,
महफिल कोई भी हो यारा जिक्र तुम्‍हारा होता है,
हर मौसम हर रूत में यारा, याद की बदली छाती है,
लाख भुलाऊं , याद तुम्‍हारी हर पल आती है।
अपनी फिक्र नहीं है लेकिन ख्‍याल तुम्‍हारा है,
तुमसे बिछड़ के दीवानों सा हाल हमारा है, 
तूफां में भी रोशन यारा, तेरी याद की बाती है,
लाख भुलाऊं , याद तुम्‍हारी हर पल आती है,
दिल को हर पल यार तुम्‍हारी याद सताती है

बुधवार, 18 फ़रवरी 2015

दिल है आईना


भूलकर भी न उछालो इसको,
दिल है आईना संभालो इसको।
टूट जाए तो नहीं जुड़ता है,
हो सके गर तो बचा लो इसको।
दिल को कदमों में न रखिए हरगिज,
गर रखा है तो उठा लो इसको।
रू-बरू उनके है खो जाता दिल,
हुस्‍न वालों से छुपा लो इसको।
दिल के खाने को न रखिए खाली,
उसकी यादों से सजा लो इसको।

शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2015

प्यार में जीना


प्यार में जीना,प्यार में मरना,
प्यार बिना क्या जीकर करना।
प्यार की खुशबू  से है यारों,
दिल की धड़कन,सांस का चलना।
प्यार से दुनिया है गर्दिश में,
शम्सो-कमर का चलना,चमकना।
प्यार से कुदरत में रंगत है ,
हवा की सर-सर, कली का खिलना।
प्यार में बहता नहीं लहू है ,
प्यार नई करता है रचना।
 प्यार किया तो प्यार जता दो,
इजहार में देर न करना।
प्यार में रहकर दूर सनम से,
तय है दिल का 'राज' तड़पना।

रविवार, 8 फ़रवरी 2015

चाँद का दीदार


चाँद का जब मुझे दीदार नज़र आता है,
रास्ता इश्क का गुलज़ार नज़र आता है.
मेरी कोशिश,मेरी ख्वाहिश,मेरा मकसद यारा,
तेरी जुल्फों में गिरफ्तार नज़र आता है.
हुस्न के नाजो-अदा की है निराली दुनिया,
उनकी ना-ना में भी इकरार नज़र आता है.
याद आता है सफ़र में जो तुम्हारा चेहरा,
राह मुश्किल में भी हमवार नज़र आता है.
मैंने माना के ज़माना यह हसीं है लेकिन,
तू नहीं है तो यह बेकार नज़र आता है.
तुझसे रिश्ता नहीं यूँ ही के भुला दूं तुझको,
दिल का तुमसे ही जुड़ा तार नज़र आता है.
हाल क्या अपना बताऊँ,तू समझ ले कासिद,
आँख खोलूँ तो वह हर बार नज़र आता है.
चश्मे-उल्फत में अजब जोर है देखा मैंने,
लाख पर्दा हो मेरा यार नज़र आता है.
मुस्करा कर न चुरा राज से नज़रें अपनी,
तेरी आँखों में ही संसार नज़र आता है.