गुरुवार, 7 नवंबर 2013
रविवार, 11 अगस्त 2013
तो अच्छा था
मैं सो लेता
तो अच्छा था,
बिछड़कर तुमसे मैं यारा,
जो रो लेता
तो अच्छा था.
वफा में जख्म
जो आए,
उन्हें कब
तक संभालूं मैं,
लगे हैं दाग़
जो दिल पर,
वो धो लेता
तो अच्छा था.
मुझे सोने नहीं
देते,
तुम्हारे साथ
गुजरे पल,
तुम्हारी याद
का तकिया,
मैं खो देता
तो अच्छा था.
मैं अक्सर
रात–दिन तेरी,
वफा के गीत
गाता हूं,
फसल अब दूसरी
कोई,
जो बो लेता
तो अच्छा था.
मैं उसके बिन
भी जी लूंगा,
वो मेरे बिन
भी जी लेगा,
सफर में साथ
गर मेरे ,
वो हो लेता
तो अच्छा था.
गुरुवार, 8 अगस्त 2013
ईद है
साथ हों अपने
तो समझो
ईद है,
सच हों गर
सपने तो
समझो ईद
है।
जुस्तजू में चांद
के गर
आसमां को,
सब लगें तकने
तो समझो
ईद है।
चल के दुकानों
से सिंवई
दोस्तों,
लग गई पकने
तो समझो
ईद है।
कोई छोटा हो
या फिर
कोई बड़ा,
सब लगें सजने
तो समझो
ईद है।
चेहरा मुरझाया सा
रोजेदार का,
जब लगे खिलने
तो समझो
ईद है।
हो मुबारक ईद
,मुबारक ईद
हो,
सब लगें कहने
तो समझो
ईद है।
सर्दमेहरी छोड़कर पहलू
में वो,
गर लगें तपने
तो समझो
ईद है।
| by-jalauddin khan |
ساتھ ہوں اپنے
تو سمجھو عید ہے
سچ ہوں گر سپنے
تو سمجھو عید ہے
جستجو میں چاند کے
گر آسماں کو
سب لگیں تكنے تو
سمجھو عید ہے
چل کے دوکانوں سے
سوي دوستوں
لگ گئی پکنے تو
سمجھو عید ہے
کوئی چھوٹا ہو یا
پھر کوئی بڑا
سب لگیں سجنے تو
سمجھو عید ہے
چہرہ مرجھايا سا روجےدار
کا
جب لگے کھلنے تو
سمجھو عید ہے
ہو مبارک عید، مبارک
عید ہو
سب لگیں کہنے تو
سمجھو عید ہے
سردمےهري
چھوڑ کر پہلو میں
وہ
گر لگیں تپنے تو
سمجھو عید ہے
सोमवार, 10 जून 2013
यकीं करो
यकीं
करो के तुम्हारे प्यार में हूं मैं,
नहीं
हो तुम मगर इंतजार में हूं मैं।
मैं
तक रहा हूं तेरी राह आज भी तन्हा,
यूं
कहने को तो बैठा हजार में हूं मैं।
मैं
तुझको खो के अजीयत में जी रहा हूं दोस्त,
तेरे
बगैर तो जैसे के नार में हूं मैं।
मेरे
बगैर तेरी सुबह,तेरी शाम न थी,
तू
सच बता क्या अब भी तेरी पुकार में हूं मैं।
तुम्हारी
मद भरी आंखों से मैंने जो पी थी,
अभी
तलक उसी नशा,उसी खुमार में हूं मैं।
शुक्रवार, 3 मई 2013
हमदम
तुम्हारे दोस्त बहुत हैं मेरे सिवा हमदम,
निभाया सिर्फ मगर हमने है वफा हमदम.
झुका के सर तेरा हर सितम सहा हमने,
कभी न पूछा , क्या हमसे हुई खता हमदम.
तुम्हारे बाद भी तुमको ही ढूंढते हैं हम,
कोई भी चेहरा न भाया तेरे सिवा हमदम.
तुम्हें ही सोचूं,तुम्हारा ही तजकिरा मैं करूं,
सुबह से शाम तलक है ये मशगला हमदम.
यह और बात है तुमने मेरी सदा न सुनी,
तुम्हें ही हमने हमेशा दिया सदा हमदम.
तुम्हें भुलाने की कोशिश भी कैसे मैं करता,
तुम्हारा नाम है दिल पर मेरे लिखा हमदम.
जहां भी तू हो वहां खुशियों का बसेरा हो,
मैं मांगता हूं यही रात–दिन दुआ हमदम
शनिवार, 3 नवंबर 2012
नम है नजर
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
तेरे ख्यालों में,कटता ये दिन है,
तेरे बिना ये ,जीवन कठिन है,
है बेकरारी का मेरा सफर,
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
तू साथ मेरे ,जाता जहां हूं ,
तुझसे जुदा मैं रहता कहां हूं ,
तू भी कभी ले मेरी खबर,
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
तुझसे ही गमगीं,है शाद तुझसे,
दिल की ये दुनिया,आबाद तुझसे,
ठुकरा न मुझको ,तू इस कदर,
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
तेरे लिए ही जीता हूं मैं तो,
तेरे लिए ही मरता हूं मैं तो,
दामन छुड़ा न,पल भर ठहर,
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
तेरी अदा ,बातें तेरी,
साथ सदा हैं ,यादें तेरी,
कैसे भुलाऊं ,बीता सफर,
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
तुमने कहा था,यादों से पहले,
आ जाओगे तुम,ख्वाबों से पहले,
वादा न तोड़ ,ऐ हमसफर,
शब बेकरार ,नम है नजर,
भटका करूं मैं शामो–सहर।
मंगलवार, 9 अक्टूबर 2012
तुम्हारा नाम न आये
बिछड़ के तुमसे,
हमारा अजीब हाल रहा,
तुम्हारे बाद भी जिंदा हैं,
ये कमाल रहा.

सज़ा कुबूल है लेकिन,
खता हुई क्या है ?
हमारे लब पे हमेशा,
ही ये सवाल रहा.
ये ज़िन्दगी का सफ़र,
यूँ तो चल रहा है मगर,
तुम्हारा साथ नहीं है,
यही मलाल रहा.
फ़साना मैंने मोहब्बत का,
है लिखा लेकिन,
तुम्हारा नाम न आये,
मुझे ख़्याल रहा.
मिले थे जब मुझे ,
और जब जुदा तुम हुए,
वो लम्हा याद मुझे,
"राज"सालों - साल रहा.
सदस्यता लें
संदेश (Atom)







