रविवार, 8 दिसंबर 2013
शनिवार, 7 दिसंबर 2013
खो रहा है वो
जाने क्यों आज सो रहा है वो‚
वक्त बेवजह खो रहा है वो।
मौत का वक्त तय तो है लेकिन‚
सुबह से बैठा रो रहा है वो।
आरजू तो है सिर्फ फूलों की‚
पेड़ कांटों के बो रहा है वो।
जो गया लौट कर न आएगा‚
वक्त हासिल क्यों खो रहा है वो।
साथ कैसे चलेगा दुनिया के‚
कल को कांधे पे ढो रहा है वो।
स्याह किरदार हो गया है मगर‚
दाग दामन के धो रहा है वो।
रविवार, 1 दिसंबर 2013
हमें तो याद है।
घेर कर बैठी हैं यादें,यादों की बारात है,
हर तरफ है बर्फ गिरती,हर तरफ बरसात है।
तू नहीं था पर तेरी तस्वीर हाथों में रही,
गुफ्तगू में रात गुजरी फिर भी बाकी बात है।
सब दुआएं पढ़ गए ,पर नींद हमसे दूर थी,
हमने देखा हिज्र की लम्बी बहुत ही रात है।
साथ हमदोनों चले थे,यह कहानी तो नहीं,
तुम जो चाहो भूल जाओ पर हमें तो याद है।
दिल किसी भी हाल में तन्हा नहीं होता मेरा,
तुम नहीं हो पर तुम्हारी याद मेरे साथ है।
हमने सोचा हिज्र में दिल कहीं गुम जाएगा,
दिल तुम्हारी याद से आज भी आबाद है।
साथ होना चाहिए कुछ तो सामाने-सफर,
बात ये अच्छी नहीं के 'राज'खाली हाथ है।
गुरुवार, 7 नवंबर 2013
रविवार, 11 अगस्त 2013
तो अच्छा था
मैं सो लेता
तो अच्छा था,
बिछड़कर तुमसे मैं यारा,
जो रो लेता
तो अच्छा था.
वफा में जख्म
जो आए,
उन्हें कब
तक संभालूं मैं,
लगे हैं दाग़
जो दिल पर,
वो धो लेता
तो अच्छा था.
मुझे सोने नहीं
देते,
तुम्हारे साथ
गुजरे पल,
तुम्हारी याद
का तकिया,
मैं खो देता
तो अच्छा था.
मैं अक्सर
रात–दिन तेरी,
वफा के गीत
गाता हूं,
फसल अब दूसरी
कोई,
जो बो लेता
तो अच्छा था.
मैं उसके बिन
भी जी लूंगा,
वो मेरे बिन
भी जी लेगा,
सफर में साथ
गर मेरे ,
वो हो लेता
तो अच्छा था.
गुरुवार, 8 अगस्त 2013
ईद है
साथ हों अपने
तो समझो
ईद है,
सच हों गर
सपने तो
समझो ईद
है।
जुस्तजू में चांद
के गर
आसमां को,
सब लगें तकने
तो समझो
ईद है।
चल के दुकानों
से सिंवई
दोस्तों,
लग गई पकने
तो समझो
ईद है।
कोई छोटा हो
या फिर
कोई बड़ा,
सब लगें सजने
तो समझो
ईद है।
चेहरा मुरझाया सा
रोजेदार का,
जब लगे खिलने
तो समझो
ईद है।
हो मुबारक ईद
,मुबारक ईद
हो,
सब लगें कहने
तो समझो
ईद है।
सर्दमेहरी छोड़कर पहलू
में वो,
गर लगें तपने
तो समझो
ईद है।
| by-jalauddin khan |
ساتھ ہوں اپنے
تو سمجھو عید ہے
سچ ہوں گر سپنے
تو سمجھو عید ہے
جستجو میں چاند کے
گر آسماں کو
سب لگیں تكنے تو
سمجھو عید ہے
چل کے دوکانوں سے
سوي دوستوں
لگ گئی پکنے تو
سمجھو عید ہے
کوئی چھوٹا ہو یا
پھر کوئی بڑا
سب لگیں سجنے تو
سمجھو عید ہے
چہرہ مرجھايا سا روجےدار
کا
جب لگے کھلنے تو
سمجھو عید ہے
ہو مبارک عید، مبارک
عید ہو
سب لگیں کہنے تو
سمجھو عید ہے
سردمےهري
چھوڑ کر پہلو میں
وہ
گر لگیں تپنے تو
سمجھو عید ہے
सोमवार, 10 जून 2013
यकीं करो
यकीं
करो के तुम्हारे प्यार में हूं मैं,
नहीं
हो तुम मगर इंतजार में हूं मैं।
मैं
तक रहा हूं तेरी राह आज भी तन्हा,
यूं
कहने को तो बैठा हजार में हूं मैं।
मैं
तुझको खो के अजीयत में जी रहा हूं दोस्त,
तेरे
बगैर तो जैसे के नार में हूं मैं।
मेरे
बगैर तेरी सुबह,तेरी शाम न थी,
तू
सच बता क्या अब भी तेरी पुकार में हूं मैं।
तुम्हारी
मद भरी आंखों से मैंने जो पी थी,
अभी
तलक उसी नशा,उसी खुमार में हूं मैं।
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